हीरे की खानें कहाँ स्थित है?


भारत में आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और तमिलनाडु के कोल्लूर तथा मध्य प्रदेश के पन्ना और बुंदर में हीरा खानें हैं | भारत के हीरे क ज़माने में विश्व प्रसिद्ध थे | गोलकुंडा से 185 कैरेट का दरिया-ए नूर हीरा ईरान गया था | भारत के सबसे बड़े हीरे की बात करें तो नाम आता है ग्रेट मुगल का  | गोलकुंडा की खान से 1650 में जब यह हीरा निकला तो इसका वजन 787 कैरेट था | यानी कोहिनूर से करीब छह गुना भारी |

कहा जाता है कि कोहिनूर भी ग्रेट मुगल का ही एक अंश है | 1665 में फ्रांस के जवाहरात के व्यापारी ने इसे अपने समय का सबसे बड़ा रोजकट हीरा बताया था | यह हीरा आज कहां है किसी को पता नहीं | लंबे समय से गुमनाम भारतीय हीरों की सूची में आगरा डायमंड और अहमदाबाद डायमंड भी शामिल हैं | अहमदाबाद डायमंड को बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजीत को हराकर हासिल किया था | तब 71 कैरेट के इस हीरे को दुनिया के 14 बेशकीमती हीरों में शुमार किया जाता था | हल्की गुलाबी रंग की आभा वाले 32.2 कैरेट के आगरा डायमंड को हीरों की ग्रेडिंग करने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका ने वीएस-2 ग्रेड दिया है | द रीजेंट की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं |

1702 के आसपास यह हीरा गोलकुंडा की खान से निकला | तब इसका वजन 410 कैरेट था | मद्रास के तत्कालीन गवर्नर विलियम पिट के हाथों से होता हुआ द रीजेंट फ्रांसीसी क्रांति के बाद नेपोलियन के पास पहुंचा | नेपोलियन को यह हीरा इतना पसंद आया कि उसने इसे अपनी तलवार की मूठ में जड़वा दिया | अब 140 कैरेट का हो चुका यह हीरा पेरिस के लूव्र म्यूजियम में रखा गया है | गुमनाम भारतीय हीरों की लिस्ट में अगला नाम है ब्रोलिटी ऑफ इंडिया का | 90.8 कैरेट के ब्रोलिटी को कोहिनूर से भी पुराना बताया जाता है |

12वीं शताब्दी में फ्रांस की महारानी में इसे खरीदा | कई सालों तक गुमनाम रहने के बाद यह हीरा 1950 में सामने आया | जब न्यूयॉर्क के जूलर हेनरी विन्सटन ने इसे भारत के किसी राजा से खरीदा | आज यह हीरा यूरोप में कहीं है |
हीरे की खानें कहाँ स्थित है? हीरे की खानें कहाँ स्थित है? Reviewed by ADMIN on 01:05 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.