हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर) बजट अधिवेशन को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता है इन दोनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं इस साल से बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू करने का फैसला किया गया है |

राष्ट्रपति दोनों सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करते हैं हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं |

राष्ट्रपति का अभिभाषण
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है जो संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के समक्ष होता है अभिभाषण में ऐसी नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें आगामी वर्ष में कार्य रूप देने का विचार हो साथ ही, पहले वर्ष की उसकी गतिविधियों और सफलताओं की समीक्षा भी की जाती है अभिभाषण चूंकि सरकार की नीति का विवरण होता है अंत: सरकार द्वारा तैयार किया जाता है अभिभाषण पर चर्चा होती है और सदन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास करता है |

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