प्रकृति पुलों का निर्माण कैसे करती है?


मनुष्य प्राचीन काल से ही नदी, नाले और नहरों को पार करने के लिए पुल बनता रहा है संसार के कुछ हिस्सों में ऐसे भी पुल देखने को मिलते हैं, जो मनुष्य ने नहीं बनाए, बल्कि प्रकृति ने बनाए हैं ऐसे पुलों को प्राकृतिक पुल (Natural Bridge) कहा जाता है |

प्राकृतिक पुल आमतौर पर अद्धॅवृत्राकर होते हैं इनका निर्माण कई प्रकार से हो जाता है जमीन के कुछ हिस्सों पर बालू-पत्थर या चुना-पत्थर कि मात्रा बहुत अधिक होती है यदि इन स्थानों पर पानी के कटाव से पत्थरों के ऊपर पुल बन जाता है कुछ प्राकृतिक पुलों का निर्माण गुफाओं के टूटने से भी होता है l किसी नदी के किसी बहाव के कारण गुफाओं के निचे का भाग जो टूटता रहता है और सेष ऊपर का बचा भाग पुल का रूप धारण कर लेता है |

अमेरिका में ऊटा (Utah) एक ऐसा स्थान है, जहाँ पर तीन प्राकृतिक पूल हैं ये पूल एल्क पर्वत (ELK Ridge) के पश्चिमी ढलानों पर है l इनमें सिपापू  नाम का एक पुल नदी से 89 मीटर (286 फुट) ऊंचा है और यह 82 मीटर (269 फुट) लम्बा है इसकी मोटाई 9.5 मीटर से 16 मीटर (31 से 53 फुट) के बीच में है काचिना और ओवाचोमो दूसरे दो पुल हैं |

जिनकी ऊंचाई क्रमशः 64 मीटर (210 फुट) और 32 मीटर (106 फुट) है इन पुलों को देखने के लिए संसार के हज़ारों लोग प्रति वर्ष जाते हैं इसी प्रकार का एक प्राकृतिक पुल पश्चिमी वर्जिनिया में है, जो 66 मीटर 215 फुट ऊँचा है और 30 मीटर 100 फुट लम्बा है |
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